क्या प्यार में जिनाह जायज़ है ? हज़रत इमाम अली ने फ़रमाया…

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एक मर्तबा एक औरत हज़रत अली की खिदमत में हाजिर हुए और अर्ज़ करने लगी कि यह अली आज मैं एक हकीर सा सवाल आपकी खिदमत में लेकर हाज़िर हुई हूँ. मुझे इसका जवाब चाहिए. उस औरत का यह सवाल सुनकर हजरत अली ने फ़रमाया कि ऐ सऔरत पूछो क्या पूछना चाहती हो. तो इसके बाद उस औरत ने फ़रमाया कि अल्लाह के रसूल ने हजरत अली को इल्म का दरवाज़ा बताया है. इसलिए जब कोई इंसान अपने किसी सवाल को लेकर मायूस हो जाए और हो परेशान तो उसको उसके सवाल का जवाब हजरत अली से मिल सकता है, हजरत अली ने ऐसा फरमाया.


हजरत अली की यह बात सुनकर उस औरत ने कहा कि या अली एक शक्स मुझसे बहुत ज्यादा मुहब्बत करता है और मुझे छूने की कोशिश करता है और अपनी जिस्मी ज़रूरियत पूरी करने के लिए मुझसे मिलने की कोशिश करता है. या अली आप इरशाद फरमाएं कि क्या मेरी यह मुहब्बत मेरा गुनाह है? बस औरत का यह कहना था कि हजरत अली ने उस औरत को अपना जवाब देना शुरू किया. हजरत अली ने फ़रमाया कि ए औरत याद रखना मुहब्बत का ताल्लुक जिस्मानी मज़े से नहीं है.


हजरत अली ने आगे फ़रमाया कि मुहब्बत का ताल्लुक रूह के सुकून से होता है. हजरत अली ने आगे फ़रमाया कि ऐ औरत याद रखना कि अल्लाह की ज़ात में मुहब्बत की पहली सीढ़ी का नाम ही इज्ज़त रखा है. हजरत अली ने आगे फ़रमाया कि याद रखना जो शख्स ज़माने में तुम्हें वह इज्ज़त न दे सका तो याद रखना कि वह मुहब्बत मुहब्बत नहीं है. ऐसे दौर में जब लोगों ने प्यार का नाम और मतलब ही बदलकर रख दिया है तो उन्हें हजरत अली के बताये मुहब्बत के इस मायने को ज़रूर जानना चाहिए. इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं.


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